" अंकल " मेरे पीछे से एक आवाज आई । मैंने पीछे मुड़कर देखा तो कूड़े के ढेर में पुराने से कपड़े में एक दूधमुंही बच्ची लिपटी हुई थी। वह छोटी सी बच्ची उदास होकर मुझसे कहती है 'अंकल, मुझे आप अपने साथ ले चलो । मुझे पैदा हुए अभी 8 घंटे ही हुए हैं परंतु मेरे जन्म से मेरी मां , पिताजी और दादी तीनों निराश हो गए मुझे देखते ही मिलने वाले सब रिश्तेदार कहते हैं हाय फिर लड़की अंकल मुझे क्या जन्म नहीं लेना चाहिए था । पास में ही एक जानवर ने नर और मादा दोनों तरह के बच्चों को जन्म दिया है उनकी मां तो सब बच्चों को बराबर प्यार कर रही है । अंकल जानवर इंसान से अच्छे होते हैं । क्या , बच्ची के भारी भरकम सवालों के आगे मैं निरुतर हो गया । तभी स्कूटर पर एक पति-पत्नी बच्चे को देख कर रुक जाते है । मुझसे बच्ची के बारे में जानने के बाद औरत उस बच्ची को उठाकर अपने सीने से लगा लेती है और हाथ ऊपर उठाकर कहती है, ' हे भगवान 10 साल की तपस्या का फल आज अपने मुझको इस कन्या के रूप में दे दिया । 'आज से मैं इसे सुकन्या कह कर पुकारउंगी । अब इस बच्ची को पता चल गया था कि असली इंसान तो जानवर से बहुत बड़ा होता है लड़की के जीवन का अंधकार उम्मीद की नाव पर बैठकर सूरज की पहली किरण के पास आ गया था ।
। दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा ।। आज के जीवन में जिस भी व्यक्ति को देखो वह हर वक्त आपको भागता दिखाई देगा , आप यह मत सोचें की वह चल रहा है या उसके अंदर बॉडी के कोई किसी प्रकार का मूवमेंट है तभी वह चल रहा है अगर आप उसे अपने पास बैठा लेंगे तब भी देखेंगे कि उसका मन इतनी तेजी से चल रहा है ,प्रतिपल उसके मन में नए विचार आ रहे हैं और वह एक जगह टिक कर बैठ नहीं पा रहा है अपितु अगर हम उसे देखें तो एकबारगी हम समझेंगे कि यह बैठा हुआ है परंतु अगर उसकी मन की स्थिति देखें तो वह बहुत तेजी से बदल रही है। जब तक हम अपने शरीर और मन पर नियंत्रण नहीं करेंगे तब तक हम दिशाहीन ही भागेंगे।शरीर पर नियंत्रण बड़ा आसान है हम एकदम से बॉडी के मूवमेंट को रोकेंगे तो नियंत्रण आ जाएगा लेकिन मन में आने वाले विचारों को रोकना बहुत ही कठिन है इस पर काबू करना बहुत ही मुश्किल हैं हालांकि हम देखेंगे कि मनुष्य ने एक से एक कठिन कार्य को बड़ी आसानी से कर लिया है। लेकिन इसके लिए ठोस इच्छाशक्ति की जरूरत है। लेकिन अक्सर लोग एक दो दिन तक तो अपने दृढ़निश्चय पर टिकते है और कुछ ...
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