Skip to main content

Short Hindi Article

। दौड़ा दौड़ा  भागा भागा सा ।।

आज के जीवन में जिस भी व्यक्ति को देखो  वह हर वक्त आपको भागता दिखाई देगा  , आप यह मत सोचें की वह चल  रहा है या उसके अंदर बॉडी के कोई किसी प्रकार का मूवमेंट है तभी वह चल रहा है अगर आप उसे अपने पास बैठा लेंगे तब भी देखेंगे कि उसका मन इतनी तेजी से चल रहा है ,प्रतिपल उसके मन में नए विचार आ रहे हैं और वह एक जगह  टिक कर बैठ नहीं पा रहा है अपितु अगर हम उसे देखें तो एकबारगी हम समझेंगे कि यह बैठा हुआ है परंतु अगर उसकी मन की स्थिति देखें तो वह बहुत तेजी से बदल रही है।

जब तक हम अपने शरीर और मन पर नियंत्रण नहीं करेंगे तब तक हम दिशाहीन ही भागेंगे।शरीर पर नियंत्रण बड़ा आसान है हम एकदम से बॉडी के मूवमेंट को  रोकेंगे तो नियंत्रण आ जाएगा लेकिन मन में आने वाले विचारों को रोकना बहुत ही कठिन है इस पर काबू   करना बहुत ही मुश्किल हैं हालांकि हम देखेंगे कि मनुष्य ने एक से एक कठिन कार्य को बड़ी आसानी से  कर लिया है।
लेकिन इसके लिए ठोस इच्छाशक्ति की जरूरत है।
लेकिन अक्सर लोग एक दो दिन  तक तो अपने दृढ़निश्चय पर टिकते है और कुछ समय बाद वापस उस ही पुरानी जीवनशैली पर लौट जाते है।

हम अपने आस पास देखेंगे कि कुछ ही लोग शिखर पर पहुँचते है और हम लोग समझते है क़ि उनकी किस्मत और मेहनत ने उन्हे शिखर पर पहुँचाया लेकिन एक चीज़ और है जिसका उनकी सफलता में प्रमुख योगदान है और   वह   है  उनकी  दृढ  इच्छाशक्ति ।ऐसा नहीं,क़ि उन्हे हर काम में सफलता मिलती है अपितु वे असफलता से हार नहीं मानते और दृढ इरादों से दुबारा संघर्ष करते है ।

आपको कुछ लोग इस भागम भाग का हिस्सा बनने के लिए मना करेंगे लेकिन आज के दौर में यह नामुमकिन है अगर आप एक पारिवारिक व्यक्ति है तो यह और भी मुश्किलों भरा होता है।
आप इस दौड़ का हिस्सा बने मगर किसी से आगे निकलने के लिए नहीं बल्कि स्वयं से ही आगे निकले अर्थात अपना विकास धन से ही नहीं बल्कि अपने पारिवारिक रिश्तों का ,सामाजिक तौर पर तथा अपनी अंतरात्मा का भी विकास करें ।
और अपने मन में चलने वाले विचारों के साक्षी बने तथा उन्हे हमेशा अपने काबू में रखे ।

कुछ लोग कहते है कि अपने विचारों को रोके
लेकिन क्या यह मुमकिन है ?
मैं कहूँगा कि यह नामुमकिन है अगर आप ज़िंदा है तो।
हाँ एक मृत शरीर में कोई विचार नहीं आता ।
जिस प्रकार साँसों का निरंतर आना जाना लगा रहता है उस ही प्रकार विचारों का आना जाना लगा रहता है।

तो आज से हम यह तय करेंगे कि हम भागमभाग तो करें परंतु  नियंतरित और जो कि हमें हमारे परिवार से अलग न ले जाए और सीमित विचार जो की  हमारे मन को हमेशा सकारात्मक रखें।

Comments

Popular posts from this blog

टेलीपैथी का रहस्य

टेलीपैथी से ध्यान में प्रवेश -  टेलीपैथी हमें अचेतन के तल पर प्रवेश करने के बाद उपलब्ध होती है। लेकिन तीसरे तल पर टेलीपैथी में प्रवेश करने के लिए हमारे भीतर निःस्वार्थ भाव होगा, तो ही अचेतन हमारी मदद करेगा। सबका हित, सबका मंगल, यह भाव गहन होगा तो ही हम इसमें उतर पाएंगे। यदि हम किसी का अहित चाहेंगे तो हम इस प्रयोग में नहीं उतर पाएंगे। क्योंकि यह विधा जन कल्याण के लिए ही है। यदि हमारा विचार, हमारा भाव सकारात्मक होगा तो ही हम इसमें गति कर पाएंगे। नकारात्मकता के लिए इसमें कोई जगह नहीं है।  जिस व्यक्ति को भी हम टेलीपैथी से संदेश देंगे यदि हमारा संदेश उसके हित में होगा और वह हमारे प्रति प्रेमपूर्ण होगा, तो ही वह ग्राहक बन पाएगा । यदि हमारा संदेश उसके अहित में होगा तो अचेतन हमारा साथ नहीं देगा और प्रकृति भी हमारा साथ नहीं देगी।  टेलीपैथी में नकारात्मकता के लिए जगह क्यों नहीं है?  जब हम टेलीपैथी में उतरकर संदेश संप्रेषित करेंगे और यदि संदेश नकारात्मक है तो अचेतन हमें बार बार सचेत करेगा। हम ने अनुभव किया है कि जब कोई काम हमारे अनुकूल नहीं था, जिसमें दूसरे को चोट पहुंचने की सं...

स्नेह और सहयोग के साथ शक्ति रूप बनो तो राजधानी में नम्बर आगे मिल जायेगा।

• प्रश्नः- तुम्हारी याद की यात्रा पूरी कब होगी? • उत्तर:- जब तुम्हारी कोई भी कर्मेद्रियाँ धोखा ना दें, कर्मातीत अवस्था हो जाए, तब याद की यात्रा पूरी होगी। अभी तुमको पूरा पुरुषार्थ करना है, नाउम्मीद नहीं बनना है। सर्विस पर तत्पर रहना है। मीठे-मीठे बच्चे आत्म-अभिमानी होकर बैठे हो? बच्चे समझते हैं आधाकल्प हम देह-अभिमानी रहे हैं। अब देही-अभिमानी हो रहने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। बाप आकर समझाते हैं अपने को आत्मा समझकर बैठो तब ही बाप याद आयेगा। नहीं तो भूल जायेंगे। याद नहीं करेंगे तो यात्रा कैसे कर सकेंगे! पाप कैसे कटेंगे! घाटा पड़ जायेगा। यह तो घड़ी-घड़ी याद करो। यह है मुख्य बात। बाकी तो बाप अनेक प्रकार की युक्तियां बतलाते हैं। रांग क्या है, राइट क्या है - वह भी समझाया है। बाप तो ज्ञान का सागर है। भक्ति को भी जानते हैं। बच्चों को भक्ति में क्या-क्या करना पड़ता है। समझाते हैं यह यज्ञ तप आदि करना, यह सब है भक्ति मार्ग। भल बाप की महिमा करते हैं, परन्तु उल्टी। वास्तव में कृष्ण की महिमा भी पूरी नहीं जानते। हर एक बात को समझना चाहिए ना। जैसे कृष्ण को वैकुण्ठ नाथ कहा जाता है।  अच्छा, बाबा पू...