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Short Hindi Article - " नंगा सच "

नंगा सच

यह लेख किसी राजनीतिक प्रेरणा से नहीं लिखा जा रहा है यह लेख निष्पक्ष है इस लेख के द्वारा मैं उस समाज के आईने को दिखाना चाहता हूं जहां पर राजनेता तो लड़ते ही है अब जनता भी आपस में लड़ रही है ।

मैं यह दिखाना चाह रहा हूं कि हम आपस में ना झगड़े तथा अपने विचारों को प्रकट करें और सिर्फ विचार रखने से भी कुछ नहीं होगा जब तक उन विचारों को हम एक मूल रूप नहीं देते। हम इस समाज के निर्माण में भागीदार बन सके ना कि इतने विध्वंसक हो जाए कि हम समाज को पतन की ओर ले जाए|
आज जहां जाओ हर आदमी या तो यह कह रहा है या सोशल मीडिया पर यह लिख रहा है कि मैं भी चौकीदार वह नरेंद्र मोदी जी की इस मुहिम से जुड़ना चाहता है जिसमें वह कह रहे हैं कि मैं भी चौकीदार अर्थात में भ्रष्टाचार के खिलाफ हो और जो भी भ्रष्टाचार करता है उसके खिलाफ कदम को रोकते हैं जिस प्रकार से कोई चौकीदार किसी चोर को पकड़ लेता है ।
इस मुहिम से जुड़ना अच्छी बात है लेकिन मात्र कहने से कि “मैं भी चौकीदार “क्या वो व्यक्ति देश के सबसे ईमानदार व्यक्ति हो जातें हैं।
इस मुहिम में वे लोग भी शामिल हैं जिनके माता-पिता भाई-बहन या कोई रिश्तेदार किसी जमाने में उच्च सरकारी पदों पर बैठे रहे और जमे रहे और धीरे-धीरे रिश्वत की चाशनी चूस चूस कर अपने परिवार को पाला और अच्छे पदों पर बैठाया और बच्चों को बाहर विदेशों में पढ़ने भेजा आज वही बच्चे बाहर विदेशों में तथा देश के कोने-कोने से लिख कर भेज रहे है कि मैं भी चौकीदार क्या उन्होंने अपना कभी पारिवारिक बैकग्राउंड देखा है क्या उनके माता पिता ने रिश्वत नहीं ली । या फिर वह अगर व्यापारी वर्ग के हैं तो क्या उनके पिताजी ने अपने व्यापार में किसी प्रकार की रिश्वत नहीं दी हो या किसी दुकान पर बैठकर नकली सामान न बेचा हो हम उसी देश से है जहां पर ही सब कुछ चलता है और आज भी हम देखते हैं कि ज्यादातर 90 से 95% हमारे देश में करप्शन माना जाता है और फिर भी हर आदमी अपने आप को ईमानदार समझता है ।
मैं यह नहीं चाह रहा हूं कि हर आदमी जो उच्चे पद पर बैठा है वह चोर है बेईमान है लेकिन अगर आप जाकर देखें तो सब में यही है कि सभी लोग किसी न किसी तरह से भ्रष्टाचार से जुड़े हुए हैं लेकिन मात्र लिख देने से वह इस भ्रष्टाचार की मुहिम के खिलाफ चल रही लड़ाई से नहीं जुड़ सकते जब तक वह अपने मन से भ्रष्टाचार को दूर नहीं करेंगे।
और आज सबसे बड़ी दुविधा जनमानस में या मैं जब किसी व्यक्ति से बात कर रहा हूं अगर मुझसे कहते हैं कि यह कोई मुहिम नहीं है कि मैं भी चौकीदार तो वह आपको यह समझेगा कि जैसे आप सबसे बड़े भ्रष्टाचारी है अगर आप इस मुहिम से नहीं जुड़ रहे हैं तथा झूठ का ही मुखौटा नहीं पहन रहे हैं तो वह समझा जायेगा कि आप नरेंद्र मोदी की इस मुहिम के खिलाफ है तथा आप और आपके घर में जो भी पैसा आ रहा है वह सब भ्रष्टाचार का है तथा लेकिन मेरा यह मानना है कि पहले आप देखें कि जैसे कहां गया है किसी पिक्चर में पहले की पत्थर वही मारे जिसने पाप ना किया हो और सब लोग पत्थर नहीं मार पाते हैं क्योंकि सब ने किसी न किसी रूप में पाप किया होता है उसी प्रकार हम जिस देश में रह रहे वहा हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।
यहां मैं कोई अपना राजनीतिक विचार नहीं प्रकट कर रहा हूं ना ही मैं किसी पार्टी के संदर्भ में कोई अपना लेख लिख रहा हूं मैं एक बात कहना चाहता हूं कि जहां पर मैं एक भेड़ चाल सी में महसूस कर रहा हूं कि आज हमारा समाज दो ही प्रकार के लोगों में बंटा हुआ है एक जो नरेद्र मोदी की तरफ है और दूसरे जो उसके विरोध में है। आज जरूरत है हमें अपनी खुद की समझदारी से काम लेने की लेकिन राजनेताओं कि किसी राजनीतिक मुहिम के पीछे भागने की जरूरत नहीं है । आज जरा सी थोड़े दिन पहले सैनिकों की बात हुई तुम सैनिकों के पीछे भागने लगे और चौकीदार की बात हुई तो चौकीदार के पीछे भागने लगे तभी राहुल गांधी कुछ कह देते तो उनके विरोध में या उनके समर्थन में खड़े हो जाते हैं ।
आज जरूरत है तो अपनी सोच को समझदार बनाने की जिससे कि देश के बारे में हम कुछ सोच सके तथा निर्णय ले सके ।
आज मैं देख रहा हूं कि इतना राजनेता नहीं लड़ रहे जितनी जनता आपस में एक दूसरे से लड़ रही है चाहे वह सोशल मीडिया पर हो निजी हो ,हर व्यक्ति जो अपनी राजनेताओं की तरह बोलता है वह चाहता है कि सब लोग उसी की तरह बोले तथा दूसरी तरफ से कोई भी विरोध नहीं हो ।
जो कि आज के दौर में नामुमकिन सा है क्योंकि हर व्यक्ति अपनी बात कहने का स्वतंत्र है लेकिन उस स्वतंत्रता की एक मर्यादा भी है कृपया किसी भी प्रकार की राजनीति के समर्थन या विरोध में हम इतना समर्थन या इतना विरोध करें कि अपनी सीमाओं को ना पार करें ।
धन्यवादhttps://mukulblog.travel.blog/2019/03/22/नंगा-सच/

                   

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