Skip to main content

सम्मोहन क्या है?

Free Image on Pixabay - Hypnosis, Circles, Concentrical Tangle Patterns, Textile Patterns, Free Pictures, Free Images, Foto Gif, Cool Optical Illusions, Illusion Art, Illusion Paintings, Op Artसम्मोहन एक शुद्ध  विज्ञान है, यह कोई जादू-टोना व अघोर साधना नही है। सम्मोहन बहुत प्राचीन विज्ञानं है। सम्मोहन कोई विदेशी खोज नही है। इसका जन्म भारत में ही हुआ है। 

सम्मोहन के द्वारा अनेक प्रकार के रोगो का उपचार सफलता से किया जा सकता है। बहुत से दुखी और पीड़ितों को नया जीवन दिया जा सकता है। इसको आज वैज्ञानिक रूप में भी स्वीकार किया जा रहा है। 

जिसमे सुझाव ग्रहण करने की क्षमता है। प्रत्येक व्यक्ति में चुम्बकीय शक्ति होती है। समुचित उपयोग करने से किसी भी व्यक्ति को सम्मोहित किया जा सकता है पर वह (मंद-बुद्धि, पागल व अविश्वासी और अहंकारी) न हो। सम्मोहन की अवस्था में अवचेतन मन जागृत किया जाता है। अवचेतन मन को जो सन्देश व संकेत दिये जाते है, चेतन मन उसका पालन करने लगता है, क्यूंकि अवचेतन मन विचार ग्रहण करने की क्षमता शक्तिशाली रूप में होती है।
सम्मोहन का हमारे मन से  सम्बन्ध है। 
 मनुष्य के मन के दो स्तर होते है। इसकी पहचान के लिए दो नाम देते है: चेतन मन और अवचेतन मन। मानव शरीर की कुछ क्रियाएँ अवचेतन मन से और कुछ चेतन मन से चलती है। किसी क्रिया को रोकना, शरीर के अंगो का उपयोग करना, भले-बुरे में से चुनाव, सुख-दुःख की अनुभूति चेतन मन के द्वारा होती है। जिस मन के द्वारा हम जागृत अवस्था में इस संसार का अनुभव कर सकते है उसे चेतन मन कहते है। चेतन मन बाहरी वस्तुओं तथा परिस्थितियों से ज्यादा प्रभावित होता है। मानव मन का एक स्वभाव है, जिस बात को हम बार-बार सुनते हैं, उस पर हमारा विश्वास हो जाता है चाहे वो बात असत्य क्यों न हो।
मानव सैकड़ों दृश्य एवं वस्तुएं देखता है। इन वस्तुओं, दृश्यों, विचारों तथा संवेदनाओं को हमेशा के लिए याद रखते है भूलते नही या जिस विद्या या कला को एक बार सीख लेते है, वह चीज़ हमें जीवन भर याद रहती है। यह सब ज्ञान जहाँ अंकित हो जाता है। उसी स्थान को हम अवचेतन मन के नाम से जानते है।
हमारा चेतन मन जिन्हें अनदेखा छोड़ देता है, ऐसे दृश्य व हमारी मनोकामनाएं तथा स्वप्न सृष्टि के दृश्यों को सुरक्षित रखने के संग्रह को अवचेतन मन कहते है। चेतन मन द्वारा अवचेतन मन के सम्बन्ध में, या अवचेतन मन में जो दृश्य या विचार पहुँचने के बाद भी उनका स्मरण नही होता, और अवचेतन मन के विषय में आश्चर्य की बात यह है कि मानव के जन्म से लेकर इस संसार में जो भी घटनाएँ घटती है।
 वे सारी की सारी अवचेतन मन की गहराई में अंकित हो जाती है। लेकिन ये बाते हमारे चेतन मन में नही आती है। अवचेतन मन हमारी कई प्रकार से सेवा करता है। जैसे- शरीर को सुरक्षित रखने की कोशिश करता है, हमारे शरीर में बिमारी से लड़ने की प्रतिरोधी क्षमता पैदा करता है, और आने वाले संकटों का पूर्व आभास कराता है। मानव शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अवचेतन मन लगातार कोशिश करता रहता है। हमारे शरीर में जब कोई विकृति या रोग पैदा होते है तब हमारा अवचेतन मन उसे नष्ट करने के लिए हमेशा तैयार रहता है।
   V

Comments

Popular posts from this blog

कुंडलिनी जागरण में नाभि और श्वास की भूमिका -

नाभि पर ध्यान करने से क्या होगा ? आती-जाती श्वास पर ध्यान करने से क्‍या होगा? नाभि की साधना में हमें चलते-फिरते, उठते-बैठते एक ही बात का स्‍मरण रखना होता है, नाभि का। श्‍वास के साथ नाभि भी पेट की गति के साथ उपर नीचे हो रही है। बस इतना ही स्‍मरण रखना है। इसके विषय में सोचना- विचारना नहीं है। सिर्फ इस बात का ख्याल भर रखना होता है। नाभि के प्रति इतना ध्‍यान रखना है, कि श्‍वास जब भीतर आई तो नाभि पेट के साथ उपर उठी है और श्‍वास जब बाहर गयी तो नाभि पेट के साथ नीचे गयी है। यानि पेट के साथ नाभि का डोलना हमारे ध्यान में हो! और श्‍वास की साधना में भी चलते-फिरते, उठते-बैठते एक ही बात का स्‍मरण रखना होता है कि अब श्‍वास भीतर गई है, और अब श्वास बाहर गई है। इस बात का ध्‍यान रखना है, स्‍णरण रखना है कि श्‍वास जब भीतर जाए और श्‍वास जब बाहर आए, तो यह बात हमारी देखरेख में हो, हमारी निगरानी में हो। न तो इस विषय में सोचना- विचारना है, और न ही श्‍वास को कोई गति देना है। श्‍वास को अपनी लय में ही चलने देना है। सिर्फ श्‍वास को भीतर- बाहर, आते- जाते महसूस करना है, उसका ध्‍यान रखना है। हम यात्रा नाभि से भी शुरु ...

Short Hindi Article

। दौड़ा दौड़ा  भागा भागा सा ।। आज के जीवन में जिस भी व्यक्ति को देखो  वह हर वक्त आपको भागता दिखाई देगा  , आप यह मत सोचें की वह चल  रहा है या उसके अंदर बॉडी के कोई किसी प्रकार का मूवमेंट है तभी वह चल रहा है अगर आप उसे अपने पास बैठा लेंगे तब भी देखेंगे कि उसका मन इतनी तेजी से चल रहा है ,प्रतिपल उसके मन में नए विचार आ रहे हैं और वह एक जगह  टिक कर बैठ नहीं पा रहा है अपितु अगर हम उसे देखें तो एकबारगी हम समझेंगे कि यह बैठा हुआ है परंतु अगर उसकी मन की स्थिति देखें तो वह बहुत तेजी से बदल रही है। जब तक हम अपने शरीर और मन पर नियंत्रण नहीं करेंगे तब तक हम दिशाहीन ही भागेंगे।शरीर पर नियंत्रण बड़ा आसान है हम एकदम से बॉडी के मूवमेंट को  रोकेंगे तो नियंत्रण आ जाएगा लेकिन मन में आने वाले विचारों को रोकना बहुत ही कठिन है इस पर काबू   करना बहुत ही मुश्किल हैं हालांकि हम देखेंगे कि मनुष्य ने एक से एक कठिन कार्य को बड़ी आसानी से  कर लिया है। लेकिन इसके लिए ठोस इच्छाशक्ति की जरूरत है। लेकिन अक्सर लोग एक दो दिन  तक तो अपने दृढ़निश्चय पर टिकते है और कुछ ...

"शीर्षासन"

शीर्षासन कोई आसन नहीं है! शीर्षासन को आसन समझना हमारी भूल होगी!! स्वामी जी मुझे सीरशासन के बारे में कुछ जानकारी देगें क्या? मुझे यह जानना है कि क्या सीरशासन करने से कुंडलिनी शक्ति नीचे की ओर सहस्त्रार चकर में आ जाती है क्या?  कुंडलिनी जागरण से पहले शीर्षासन में प्रवेश करना नुकसानदेह होगा। क्योंकि शीर्षासन कोई आसन नहीं है। शीर्षासन कुंडलिनी जागरण के बाद हमारे शरीर पर घटने वाली एक महत्वपूर्ण घटना है। शीर्षासन में प्रवेश करने पर हमारे शरीर की क्रियाशीलता प्रभावित होती है। पाचनतंत्र प्रभावित होगा और मष्तिष्क में खून का प्रवाह ज्यादा होगा जो मष्तिष्क के लिए नुकसानदायक होगा। यदि हम अपने वाहन को उल्टा कर देंगे तो क्या होगा? आईल बाहर आएगा, डीजल- पेट्रोल बाहर आएगा और यात्रा करने की बात तो हम सोच भी नहीं सकते हैं। जब हम अपने वाहन को उल्टा नहीं कर सकते हैं, तो अपने शरीर को कैसे उल्टा कर सकते हैं? क्योंकि हमारा शरीर भी तो अंतर्यात्रा के मार्ग में हमारा वाहन ही है!  शीर्षासन के संबंध में हमेशा से पहली बात तो यह भ्रम रहा है कि यदि उर्जा उपर नहीं उठ रही है तो शरीर को उल्टा कर लेते हैं ताकि ...