• उत्तर:- आपस में लड़ना-झगड़ना, रूठना, सेन्टर पर धमपा मचाना, दु:ख देना - यह आसुरी गुण हैं, जो तुम्हारे श्रृंगार को बिगाड़ देते हैं। जो बच्चे बाप का बन करके भी इन आसुरी गुणों का त्याग नहीं करते हैं, उल्टे कर्म करते हैं, उन्हें बहुत घाटा पड़ जाता है। हिसाब ही हिसाब है। बाप के साथ धर्मराज भी है। यह तो हम जान चुके हैं कि ऊंच ते ऊंच भगवान है। मनुष्य गाते हैं और तुम देखते हो दिव्य दृष्टि से। तुम बुद्धि से भी जानते हो कि हमको वह पढ़ा रहे हैं। आत्मा ही पढ़ती है शरीर से। सब कुछ आत्मा ही करती है शरीर से। शरीर विनाशी है, जिसको आत्मा धारण कर पार्ट बजाती है। आत्मा में ही सारे पार्ट की नूँध है। 84 जन्मों की भी आत्मा में ही नूँध है। पहले-पहले तो अपने को आत्मा समझना है। बाप है सर्वशक्तिमान्। उनसे तुम बच्चों को शक्ति मिलती है। योग से शक्ति जास्ती मिलती है, जिससे तुम पावन बनते हो। बाप तुमको शक्ति देते हैं विश्व पर राज्य करने की। इतनी महान शक्ति देते हैं, वह साइंस घमन्डी आदि इतना सब बनाते हैं विनाश के लिए। उनकी बुद्धि है विनाश के लिए, तुम्हारी बुद्धि है अविनाशी पद पाने के लिए। तुमको बहुत शक्ति मिलती...