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• प्रश्नः- कौन से आसुरी गुण तुम्हारे श्रृंगार को बिगाड़ देते हैं?

• उत्तर:- आपस में लड़ना-झगड़ना, रूठना, सेन्टर पर धमपा मचाना, दु:ख देना - यह आसुरी गुण हैं, जो तुम्हारे श्रृंगार को बिगाड़ देते हैं। जो बच्चे बाप का बन करके भी इन आसुरी गुणों का त्याग नहीं करते हैं, उल्टे कर्म करते हैं, उन्हें बहुत घाटा पड़ जाता है। हिसाब ही हिसाब है। बाप के साथ धर्मराज भी है।  यह तो हम जान चुके हैं कि ऊंच ते ऊंच भगवान है। मनुष्य गाते हैं और तुम देखते हो दिव्य दृष्टि से। तुम बुद्धि से भी जानते हो कि हमको वह पढ़ा रहे हैं। आत्मा ही पढ़ती है शरीर से। सब कुछ आत्मा ही करती है शरीर से। शरीर विनाशी है, जिसको आत्मा धारण कर पार्ट बजाती है। आत्मा में ही सारे पार्ट की नूँध है। 84 जन्मों की भी आत्मा में ही नूँध है। पहले-पहले तो अपने को आत्मा समझना है। बाप है सर्वशक्तिमान्। उनसे तुम बच्चों को शक्ति मिलती है। योग से शक्ति जास्ती मिलती है, जिससे तुम पावन बनते हो। बाप तुमको शक्ति देते हैं विश्व पर राज्य करने की। इतनी महान शक्ति देते हैं, वह साइंस घमन्डी आदि इतना सब बनाते हैं विनाश के लिए। उनकी बुद्धि है विनाश के लिए, तुम्हारी बुद्धि है अविनाशी पद पाने के लिए। तुमको बहुत शक्ति मिलती...

सम्मोहन क्या है?

सम्मोहन एक शुद्ध  विज्ञान है, यह कोई जादू-टोना व अघोर साधना नही है। सम्मोहन बहुत प्राचीन विज्ञानं है। सम्मोहन कोई विदेशी खोज नही है। इसका जन्म भारत में ही हुआ है।  सम्मोहन के द्वारा अनेक प्रकार के रोगो का उपचार सफलता से किया जा सकता है। बहुत से दुखी और पीड़ितों को नया जीवन दिया जा सकता है। इसको आज वैज्ञानिक रूप में भी स्वीकार किया जा रहा है।  जिसमे सुझाव ग्रहण करने की क्षमता है। प्रत्येक व्यक्ति में चुम्बकीय शक्ति होती है। समुचित उपयोग करने से किसी भी व्यक्ति को सम्मोहित किया जा सकता है पर वह (मंद-बुद्धि, पागल व अविश्वासी और अहंकारी) न हो। सम्मोहन की अवस्था में अवचेतन मन जागृत किया जाता है। अवचेतन मन को जो सन्देश व संकेत दिये जाते है, चेतन मन उसका पालन करने लगता है, क्यूंकि अवचेतन मन विचार ग्रहण करने की क्षमता शक्तिशाली रूप में होती है। सम्मोहन का हमारे मन से  सम्बन्ध है।   मनुष्य के मन के दो स्तर होते है। इसकी पहचान के लिए दो नाम देते है: चेतन मन और अवचेतन मन। मानव शरीर की कुछ क्रियाएँ अवचेतन मन से और कुछ चेतन मन से चलती है। किसी क्रिया को रोकना, शरीर ...

क्रोध की उर्जा का रूपांतरण

जब कभी तुम्हें यह पता चले कि तुम्हें क्रोध आ रहा है तो इसे सतत अभ्यास बना लो कि क्रोध में प्रवेश करने के पहले तुम पांच गहरी सांसें लो। यह एक सीधा—सरल अभ्यास है। स्‍पष्टतया क्रोध से बिलकुल संबंधित नहीं है और कोई इस पर हंस भी सकता है कि इससे मदद कैसे मिलने वाली है? लेकिन इससे मदद मिलने वाली है। इसलिए जब कभी तुम्हें अनुभव हो कि क्रोध आ रहा है तो इसे व्यक्त करने के पहले पांच गहरी सांस अंदर खींचो और बाहर छोड़ो। क्या होगा इससे? इससे बहुत सारी चीजें हो पायेंगी। क्रोध केवल तभी हो सकता है अगर तुम होश नहीं रखते। और यह श्वसन एक सचेत प्रयास है। बस, क्रोध व्यक्त करने से पहले जरा होशपूर्ण ढंग से पांच बार अंदर—बाहर सांस लेना। यह तुम्हारे मन को जागरूक बना देगा। और जागरूकता के साथ क्रोध प्रवेश नहीं कर सकता। और यह केवल तुम्हारे मन को ही जागरूक नहीं बनायेगा, यह तुम्हारे शरीर को भी जागरूक बना देगा, क्योंकि शरीर में ज्यादा ऑक्सीजन हो तो शरीर ज्यादा जागरूक होता है। जागरूकता की इस घड़ी में,अचानक तुम पाओगे कि क्रोध विलीन हो गया है। दूसरी बात, तुम्हारा मन केवल एक—विषयी हो सकता है। मन दो बातें साथ—साथ नहीं सोच सक...

Short Hindi Story

" कोई तो पास है मेरे " कोई तो पास है मेरे चलो तन्हाईयाँ ही सही बातें बहुत की उनसे हमने फिर भी रह गयी अनकही, दौर तो मुश्किल था मगर जो काट लिया वो था सही मैं तो सोच कर गया था हाँ मगर उन्होंने कह दिया नहीं, लड़ तो मैं वक़्त से भी लेता पर बाजुओं में वो ताक़त ना रही काट नहीं पा रहा अब सफ़र रास्ता जबकि है भी वही, बुलंदिया छु ली थी इतनी मैंने मंजिले मुझे खुद तलाशती रही वक़्त जब देने लगा मेरे साथ हाथों पर भी लकीरें बनती रही

Short Hindi Article

। दौड़ा दौड़ा  भागा भागा सा ।। आज के जीवन में जिस भी व्यक्ति को देखो  वह हर वक्त आपको भागता दिखाई देगा  , आप यह मत सोचें की वह चल  रहा है या उसके अंदर बॉडी के कोई किसी प्रकार का मूवमेंट है तभी वह चल रहा है अगर आप उसे अपने पास बैठा लेंगे तब भी देखेंगे कि उसका मन इतनी तेजी से चल रहा है ,प्रतिपल उसके मन में नए विचार आ रहे हैं और वह एक जगह  टिक कर बैठ नहीं पा रहा है अपितु अगर हम उसे देखें तो एकबारगी हम समझेंगे कि यह बैठा हुआ है परंतु अगर उसकी मन की स्थिति देखें तो वह बहुत तेजी से बदल रही है। जब तक हम अपने शरीर और मन पर नियंत्रण नहीं करेंगे तब तक हम दिशाहीन ही भागेंगे।शरीर पर नियंत्रण बड़ा आसान है हम एकदम से बॉडी के मूवमेंट को  रोकेंगे तो नियंत्रण आ जाएगा लेकिन मन में आने वाले विचारों को रोकना बहुत ही कठिन है इस पर काबू   करना बहुत ही मुश्किल हैं हालांकि हम देखेंगे कि मनुष्य ने एक से एक कठिन कार्य को बड़ी आसानी से  कर लिया है। लेकिन इसके लिए ठोस इच्छाशक्ति की जरूरत है। लेकिन अक्सर लोग एक दो दिन  तक तो अपने दृढ़निश्चय पर टिकते है और कुछ ...

Naked truth

Naked truth  This article is not written with any political inspiration. This article is fair. Through this article, I want to show the mirror of that society where politicians are fighting. Now the people are fighting among themselves.  I want to show that we do not fight between each other and express our thoughts and not just thinking about them, unless we give them a basic form of ideas.  We could become a partner in the formation of this society, not to be so destructive that we should take society towards the downfall.  Today, every man is saying this either or is writing on social media that I also want to join the campaign of Narendra Modi, in which he is saying that I am also against the corruption in the watchdog ie  Anyone who does corruption stops the move against the way a watchman catches a thief.  It is a good thing to join this campaign but only by saying that "I am also the custodian" do they become the most honest person of the cou...

Article on news anchor

The fastest expansion in the news world, if any medium has happened then it has happened through electronic media.  Today, most of the time, man is focusing his time on TV to listen to news and any news spreads rapidly through electronic media.  Because today's viewer is spending most of the time on these news channels on their TV channels, so any commercial companies are giving their maximum ad news channels to the channel so that the TV news channels have become fully professional and  His focus is on the fact that he can get as many viewers as possible and collect as much as possible.  In this contest, he has forgotten that his reports have a good and bad effect on the society.  For instance, at some time the village used to be a chowpaul and people used to talk about a political party among themselves or in cities often at Pan Shop or even in some other place, but now everyone is self-  View TV debates in their homes and those viewers are support...