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Showing posts from March, 2019

Short Hindi Poem - महंगाई

हो रहा था शहर में आज स्वयंवर, लड़की ढूंढ रही थी अपने लिए वर। लड़की की थी अच्छी खासी लंबाई, नाम था उसका महंगाई। महंगाई थोड़ा सा मुस्कुराई , बोली मुझसे आपको कहीं देखा है। मैंने टांग रखा था फटा पुराना बस्ता , हाथ बढ़ाकर बोला मैं मिस्टर सस्ता। वह गुस्से में बोली तेरा मेरा क्या मेल, तू पुरानी चिट्ठी मैं हूं ईमेल। मैं एक दिन में कितना ऊंचा सफर तय करती हूं, तेरी तरह थोड़ी रेंग रेंग कर चलती हूं। कर्ज़ मेरा बाप है मां मेरी मिसेस खर्चीली, आम आदमी की हालत कर देती हूं पतली। तू मेरा क्या मुकाबला कर पाएगा, कुछ साल बाद तेरा नाम मिट्टी मिल जाएगा।  हर सामान में मैं हूं मौजूद, खत्म हो चुका तेरा वजूद। तू किसी सामान में नहीं बसता है, मेरे हिसाब से यहां आदमी ही सस्ता। आदमी जब कोई सड़क पर गिरता है, कोई पैदल या वाहन नहीं रुकता है। 500 का नोट जब सड़क पर पड़ा होता है, उसे उठाने को बड़ों बड़ों का मन होता है । मैं मायावी हूं ,जादू करना मुझे आता है , पर मुझे काबू करना किसी को नहीं आता है।

Short Hindi Article - "चुनावी वायदे"

 जैसा कि आप सब जानते हैं लोकसभा चुनाव निकट है और सभी नेता अपनी अपनी तरह से चुनाव के वायदे कर रहे हैं ऐसा ही एक वायदा राहुल गांधी जी ने भी करा जिसमें वह कह रहे हैं कि वह सभी गरीब परिवारों को ₹72000 सालाना लगभग 5 करोड परिवारों को अर्थात कुल मिलाकर 3.5 लाख करोड़ के आसपास यह बजट होगा यह घोषणा उन्हें चुनाव तो जीता देगी लेकिन इस योजना को जब उन्हें लागू करना होगा तो  शायद उनकी समझ में आएगा कि यह वह क्या घोषणा कर गए। इस घोषणा का देश पर इतना भार पड़ेगा कि शायद देश की अर्थव्यवस्था भी चौपट हो जाए  । अभी मोटे तौर पर बात करी जाए तो 2018 से 2019 तक केंद्र सरकार द्वारा जो जीएसटी कलेक्शन हुआ है वह लगभग 1300000 करोड़ के आस पास बैठता है जिसमें की सरकार को पूरे देश को चलाना होता है उसमें से अगर लगभग आप यह समझ ले कि एक चौथाई राहुल गांधी जी गरीब परिवारों बाट देंगे ।कुछ वह किसानों के कर्ज माफी में दे देंगे तथा कुछ सरकार की योजनाएं जो कि सिर्फ गरीबों के लिए चलाई जाती है उस में बांट देंगे तो कुल मिलाकर वह सब कुछ मुफ्त में बांट देंगे तो देश के विकास की रफ्तार को बढ़ाने के लिए पैसा कहां से लाएं...

Short Hindi Article - न्यूज़ एं(ठ)कर

न्यूज़ एं(ठ)कर खबरों की दुनिया में सबसे ज्यादा तेज विस्तार अगर किसी माध्यम का हुआ है तो वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से हुआ है । आज ज्यादा से ज्यादा समय आदमी खबरें सुनने के लिए अपना समय टीवी के माध्यम पर फोकस कर रहा है और कोई भी खबर इलेक्ट्रॉनिक मीडियम के माध्यम से तेजी से  फैलती है। क्योंकि आज का दर्शक सबसे ज्यादा समय अपना टीवी पर इन खबरों के चैनल पर व्यतीत कर रहा है इसलिए जितनी भी कमर्शियल कंपनियां है वह अपना ज्यादा से ज्यादा एड न्यूज़ वाले चैनल को दे रही हैं जिससे कि टीवी न्यूज़ चैनल पूरी तरह व्यवसायिक हो चुके हैं और उनका फोकस इस बात पर है कि वह ज्यादा से ज्यादा दर्शक खींचे और ज्यादा से ज्यादा एड इकट्ठा कर सकें । इस होड़ में वह यह भूल चुके हैं कि उनकी खबरों का समाज पर अच्छा व बुरा असर भी पड़ता है। जैसे कि किसी जमाने में गांव पर चौपाल लगती थी और लोग आपस में किसी राजनीतिक पार्टी के विषय में वार्तालाप करते थे या फिर शहरों में अक्सर पान की दुकान या और भी कहीं किसी एक ऐसे स्थान पर विचार विमर्श करते थे लेकिन आज सभी लोग अपने-अपने घरों में टीवी की डिबेट देखते हैं और वह दर्शक ...

Short Hindi Story - सुकन्या

" अंकल " मेरे पीछे से एक आवाज आई । मैंने पीछे मुड़कर देखा तो कूड़े के ढेर में  पुराने से कपड़े में एक दूधमुंही बच्ची लिपटी हुई थी। वह छोटी सी बच्ची उदास होकर मुझसे कहती है 'अंकल, मुझे आप अपने साथ ले चलो । मुझे पैदा हुए अभी 8 घंटे ही हुए हैं परंतु मेरे जन्म से मेरी मां , पिताजी और दादी तीनों निराश हो गए मुझे देखते ही मिलने वाले सब रिश्तेदार कहते हैं हाय फिर लड़की अंकल मुझे क्या जन्म नहीं लेना चाहिए था । पास में ही एक जानवर ने नर और मादा दोनों तरह के बच्चों को जन्म दिया है उनकी मां तो सब बच्चों को बराबर प्यार कर रही है । अंकल जानवर इंसान से अच्छे होते हैं । क्या , बच्ची के भारी भरकम सवालों के आगे मैं निरुतर हो गया । तभी स्कूटर पर एक पति-पत्नी बच्चे को देख कर रुक जाते है । मुझसे बच्ची के बारे में जानने के बाद औरत उस बच्ची को उठाकर अपने सीने से लगा लेती है और हाथ ऊपर उठाकर कहती है, ' हे भगवान 10 साल की तपस्या का फल आज अपने मुझको इस कन्या के रूप में दे दिया । 'आज से मैं इसे सुकन्या कह कर पुकारउंगी । अब इस बच्ची को पता चल गया था कि असली इंसान तो जानवर से बहुत बड़ा होत...

Short Hindi Story- " वह तीन बंदर "

मास्टरजी बारहवीं कक्षा के छात्रों को पढ़ा रहे थे । पढ़ाते - पढ़ाते उन्होंने गांधी जी के अहिंसा के आंदोलन के बारे में बताया । फिर वह गांधीजी के तीन बंदरों की विशेषताएं बताने लगे । एकाएक उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े सभी छात्र दंग रह गए । छात्रों के बहुत पूछने पर उन्होंने बताया कि जो विचार गांधीजी ने इन तीन बंदरों के चिन्हित करके बताए थे । लोग उसका अनुसरण उल्टे तरीके से कर रहे हैं । एक छात्र ने उठा कर पूछा - 'वह कैसे मास्टर साहब 'मास्टर जी बोले की आज जब सड़क पर कोई दुर्घटना होती है तो सब लोग आंख पर हाथ रखकर आगे निकल जाते हैं । कोई उस व्यक्ति को उठाने वाला नहीं मिलता सड़क पर जब कोई मां-बेटी से कोई बदसलूकी करता है तो सब अपनी जुबान पर हाथ रखकर आगे निकल जाते हैं । कोई अपनी आवाज नहीं उठाता । बच्चों जब किसी सरकारी दफ्तर में कोई काम लेकर जाओ तो तुम्हारी वहां कोई सुनने वाला नहीं होता । सब सरकारी कान बंद करके बैठे हैं । जनता की आवाज कोई नहीं सुनता । इसी तरह लोग इन तीन बंदरों का गलत तरीके से अनुसरण करेंगे तो हमारा देश का क्या होगा ।

Short Hindi Article - " हमारा वोट "

दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं लोकसभा चुनाव निकट ही हैं और नेताओं के साथ - साथ आम वोटर भी दबाव में है कि वह किस प्रकार की सत्ता को चुने ।सबसे बड़ी समस्या जो मैं आज देख रहा हूं कि राजनेताओं तो पहले से ही सत्ता के लालची होते हैं और किसी न किसी प्रकार के उनके अपने निजी स्वार्थ भी होते हैं लेकिन मैं धीरे-धीरे देख रहा हूं कि आम जनमानस भी लालची होता जा रहा है तथा वह अपने लालच में वशीभूत होकर ही वोट डाल रहा है ना कि वह देख रहा है कि मेरे एक वोट से देश की दशा व दिशा दोनों ही तय होगी । वोटर के इस ही लालच को सभी राजनेता अपने अपने तरीके से भुनाने में लगे हैं जैसे कि कोई निम्न जाति का है या अनुसूचित जाति का है तो उसको आरक्षण का लाभ देकर, व्यापारी वर्ग को टैक्स में छूट देकर ,किसान को किसी कर्ज माफी के रूप में ,सरकारी कर्मचारियों को उनका महंगाई भत्ता या तनख्वाह बढ़ा कर और भी विभिन्न विभिन्न तरह के लोभ व लालच देकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं । आज जरूरत है जो भी जनमानस अर्थात भारत का नागरिक है उसको एक ऐसे व्यक्ति को वोट डालना है जो कि उसके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सके अर्थात उस क्षेत्र की समस्य...

Short Hindi Story - "शक"

                                                     राजन और पलाश बहुत अच्छे मित्र थे बहुत दिनों बाद आज उनकी मुलाकात एक बाजार में हुई । पलाश ने राजन को बताया कि उसका तबादला भी इसी शहर में हो गया है ।             राजन पलाश को अपने घर ले गया । वहां दोनों दोस्तों की पुरानी यादें ताजा हो गई। राजन ने पलाश से अपनी पत्नी का परिचय करवाया। चाय - नाश्ता और ढेर सारी बातें करके पलाश अपने घर चला गया ।                   अब वह अक्सर राजन के घर आने लगा। राजन को उसका रोज रोज घर आना और पत्नी से घुलना -मिलना अच्छा नहीं लगता था।धीरे-धीरे उसकी अपनी पत्नी से अनबन शुरू हो गई। एक दिन उसने नशे में डूब कर आत्महत्या कर ली, लेकिन उसकी आत्मा अपनी पत्नी और पलाश के बीच अटकी रही। उसे अब भी अपनी पत्नी और मित्र पर शक था।                     राजन की मौत के...

Short Hindi Article - " नंगा सच "

नंगा सच यह लेख किसी राजनीतिक प्रेरणा से नहीं लिखा जा रहा है यह लेख निष्पक्ष है इस लेख के द्वारा मैं उस समाज के आईने को दिखाना चाहता हूं जहां पर राजनेता तो लड़ते ही है अब जनता भी आपस में लड़ रही है । मैं यह दिखाना चाह रहा हूं कि हम आपस में ना झगड़े तथा अपने विचारों को प्रकट करें और सिर्फ विचार रखने से भी कुछ नहीं होगा जब तक उन विचारों को हम एक मूल रूप नहीं देते। हम इस समाज के निर्माण में भागीदार बन सके ना कि इतने विध्वंसक हो जाए कि हम समाज को पतन की ओर ले जाए| आज जहां जाओ हर आदमी या तो यह कह रहा है या सोशल मीडिया पर यह लिख रहा है कि मैं भी चौकीदार वह नरेंद्र मोदी जी की इस मुहिम से जुड़ना चाहता है जिसमें वह कह रहे हैं कि मैं भी चौकीदार अर्थात में भ्रष्टाचार के खिलाफ हो और जो भी भ्रष्टाचार करता है उसके खिलाफ कदम को रोकते हैं जिस प्रकार से कोई चौकीदार किसी चोर को पकड़ लेता है । इस मुहिम से जुड़ना अच्छी बात है लेकिन मात्र कहने से कि “मैं भी चौकीदार “क्या वो व्यक्ति देश के सबसे ईमानदार व्यक्ति हो जातें हैं। इस मुहिम में वे लोग भी शामिल हैं जिनके माता-पिता भाई-बहन या कोई रिश्तेदार...